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शुक्रवार, 14 अगस्त 2015

मुझे उस लौ की चिन्ता है


स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाये है यह पर्व मंगलमय हो ।देश के नागरिक सूख समृध्दि से परिपूर्ण हो शांति और अमन चैन रहे । सभी परस्पर सम्मान बनाये रखे यही कामनाये है  ।मंगलकामनाये
मुझे दूख है कि हम सब लोग लोकतँत्र को अपनी अपनी पक्षधरता के साथ किस ओर ले जा रहे है ।हम सब जिम्मेबार है ।कम से कम आजादी के लिये परवान चढ़े बलिदानियो के सपनो को थोड़ा बहुत पुर्ण करते तो अच्छा होता।
मै अपनी बात को अपने गीतो मे कह रहा हूँ यह  गीत 10मई 1989 को लिखा था आज भी प्रासंगिक है ।
 जो आजादी के बारे मे है जरुर पढ़े ...


मुझे उस लौ की चिन्ता है  लोकतंत्र  की चिंता मे एक गीत


सुनहरे स्वपंन मे
जलकर हुए है
खाक परवाने,
मुझे उस लौ की चिंता है
जो बुझती जा रही यारो।

किसी के हाथ में
तस्वीर है कल की
कोई आँसू बहाता 
जा रहा है आज पर,
जिन्हे भ्रम हो गया
होगा ,उजालों का
वही आँगन अँधेरा 
ला रहा है,काज कर

तरसते काम को दो हाथ
उघड़ जाता है तन और मन
करें क्या हर लिवासों मे
अँधेरे ही अँधेरे है।

मुझे उस लौ की चिन्ता है
जो बुझती जा रही यारो ।

 कमलेश कुमार दीवान
  १०मई १९८९

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